उठ उठ और जाग जाग दैया, मैया, बाबु भैया सब जुझारु
अपन कुसल और दोसरो सबके कुसलताके लेल असल कामना करु
भोर भिनुसर अनगुत भेल कतेक सुतल रहब पिके दारु
माथ ठोकते रहबहक त असल उजागर दिनो बनैत रहत तोहर अन्हारु
कामकाज सब बिगरल जारहल छौ जीवन भ्या रअल छौ तोहर उजारु
किछ पता नै चलैय कि हैय अहा केहेन छि थारु, जेना लागैये ऐ देशके भारु छि कि नेरु
कोइ थारु राजनिती खेल्लोमे जितियोके
वोकरा संविधान या कानुन बनाइछै केहेन गांडु
येहेन पाटि पलोसी चैल रहलछै देशमे
वोकरेमे सबकोइ भिरल छै मारु
हौ मलेरीया बचाइबला बलवान या पहलवान
थारु या अनेक जात जाती भाषा भााषी
राष्ट्र और राष्ट्रियताके खातिर करु
कुछ आरु और बिचारु
गुट पुट पाटि और सब सारा देशके
एकता और अखण्डताके बढका छियै बिगारु
खुइलके इ महान हुइलमे आबु और अपन महान देशके सम्हारु
आवोके दिनमे कैयौ लोभ लालचके कुचक्कर छोरु
और अपन अपन अधिकार या पहिचानके लेल भोज
चक्करमे एकता वृद्ध भ्याके सब बात करु जारु
नेत कि भज्याब पुरा सफैया कि तैयो पकरने रहबै आहासब बेमतलबके झारु
पिते रहबै कतेक दिन अनेक बिरामीसे तबाही कराबै बला जाँड और दारु
जाइन जाइनके अन्जान जका ढिठ बनल रहबैत यि तन पाइबके भविष्य ह्यात बेकारु