सुइन सुइन ढक्क हेबै, देख देख छक्क परबै । और अछैत बुइद्ध लेखा जोखा नै करबै त जिना मुस्किल भेलै हमरा ।।
डिस्क जबानाके इस्कमे हिस्क बनलासे जिना मुस्किल भेलै हमरा । अखन बातेस सब कात करे लागलछै उपरके चमकल तारा ।।
किजाने कानुन परहैछै लोग सुखल कागजमे लिखल छै धारा उपधारा । बन्दुक धारिया करैछै सब गदारिया और भ्रष्टाचारियो सबहके पहरा ।।
गुल गुल तुक तुक सब छोट मोट कहैछ,ै दुनियामे छि हम बडा । सादि स पहले सास ससुर और साइर सरहोजनि बोलाइलक दुइ चाइर बेरा ।।
तहियेसे घरवालि हमर हिरनी यी घारसुरमे कइलक डेरा । जबसे घरनी हिरनी मन मोइह लेलक कठिनसे हमरा ।।
तबसे माई बाप भाइयोके बनौलि हम बिजोरा । कहैछै हम रहबौ सहरमे ल्याके घर भाडा,
सुमधुर साजन और सजनी बइनके जीवन बितेबौ प्यारा ।।
दिदि बहिनीया और नर नातेदार गहना देने छेलौ एक झोरा । हम दुनु सब बेचि मौज मस्ति करबा,ै हौ समाज, काका बाबु भैया सब छोइरके तोरा ।।
डिस्क जवानाके………..
इ हिरनी आब घिरनी जका फिन फिन नचाबैये चिल गरी जका हमरा । जहियासे इ बिरनीह जहरमोहरासे तन मन मोहलकै हमरा ।।
रै तु प्रेम कइरक हमर बापके खेत बेचाके तोरैल्हि जोगेल्हा तिजौरा । तै दुवारे हम तोरा बनेलियौ, हम अपन लेल अवारा और घरसे केलियौ बेघारा ।।
इ घिरनी खातिर अनेक कष्ट कइर कुटल छाटल आनलि एक बोरा । तै यो टिक पकैर ठिक कैलक दश लोकमे हमरा ।।
डिस्क जवानाके इस्कमे ……………
टाटाल फाटल मात्रे नै अर्धङ्ग झलमmल चिरल पहिनके ठिस कइलक हमरा । ओतबहेक नै इसाराके गिनगिनीसे माथमे बिनबिन छोराइलक हमरा ।।
डिस्क कहने छेलहि जुट्टि जका, सज्याके फाइलमे राखबौ तोरा । कथिले आइ नवयुगमे घायल बनेलहि हमरा ।।
देश प्रदेशमे दुख सुख कइर तोरा । पठाबै छेलियौ माइ बहिन भौजिसे छुपाके सिङ्गार पटार जोरे जोरा,
आइ कथिले पागल बनाइलहि अइ नवयुगमे हमरा ।।
देखैमे लटल छि भितामे सटल छि, बुझापरैछै बात अटल छै । खाँचे खाँच मिलल छै, मगर केकरोस हटल नै चि ।।
तैयो नवयुगमे जिना कहैये रे छौरा हिपी एपलकट हौत बक बक नै कर ।
और बहुत मुर्की या फुर्कीयो नै देखा, लगमे येबौ त सब चुर्की और तुर्कीयो उखाइरलेबौ तोरा,
हेगौ बाबु जिना मुस्किल भेलै हमरा ।।
हेगौ मैया आब त हमरा कुछ कहल नै जाइये, दिलके बात उगलल नै जाइये । फटकल चौर पैँचल नै जाइये, देखहिने बेकहल मुन्सा बगलमे जाइये, यि कारणे नवयुगमे जिना मुस्किल भेलै हमरा ।।
हे गौ बाबु गौ बाबु, सुनल बात सहल नै जाइये । अने घुमै छियै ओने घुमै छियै चारुभर ।।
मच्छर काटैये सनकल मौगी बहकल जाइये । यै नवयुगमे जिना मुस्किल भेलै हमरा ।।
देखहि नै भाइ रौ कारी झोरी मिस्कट छै एकेठाम । हरहि गाइके भिन्ने बथान या गोरियाहिके छै छुटे पलान ।।
कहै छै बेर बेर या फेर फेर मिलबै मिलनमा सैँया । येहा फुलबाइर गाछि या शम्भुनाथ धाम ।।
डिस्क जमानाके इस्कमे जिना मुस्किल भेलै हमरा ………………..
मकुन चौधरी
इस्क जवाना
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